जाने स्त्रियों में बढ़ते बांझपन के कारण और उपचार .

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1. बीमारियां बढ़ती जा रही हैं

वाकई यह बात मानने वाली है कि जैसे-जैसे साइंस ने तरक्की की है, वैसे ही बीमारियां भी काफी बढ़ गई हैं। हम यह नहीं कहते कि विज्ञान में कोई दोष है, दोष तो शायद इंसान में है जिसने खुद को तकनीकी जगत में बांधकर रख दिया है। हमारी ज़िंदगी ‘ज़िंदगी’ कहलाने की बजाय महज़ मशीनी बनकर रह गई है।

2. आसपास का प्रदूषण

यह तकनीक की ही तो देन है कि हमारे वातावरण में इतने बदलाव आए हैं। लोगों की लाइफस्टाइल के चलते पृथ्वी की दशा ही बदल गई है। जहां देखो गंदगी, प्रदूषण, तथा अन्य बुरी स्थितियां बनी हुई हैं जिन्होंने नई-नई बीमारियों का इजाद किया है। स्त्री में पनपने वाली ‘बांझपन’ की दिक्कत भी कुछ इन्हीं कारणों से बढ़ती जाती है।

3. धीरे-धीरे हो रहा है प्रभावी

क्या आप जानते हैं कि हमारे आसपास का प्रदूषण एक स्त्री के शारीरिक अंगों पर कितना प्रभावी है? हमें दिखाई तो नहीं देता लेकिन धीरे-धीरे यह प्रदूषण उस महिला के अंदरूनी अंगों को नष्ट करता है। प्रदूषण के अलावा सिगरेट-बीड़ी का धुंआ भी बांझपन के लिए जिम्मेदार वस्तुओं की लिस्ट में काफी ऊपर है।

4. महिलाओं में बढ़ता बांझपन

चिकित्सकीय संदर्भ से जानें तो पॉलिसिस्टिक ऑवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) भारतीय प्रजनन आयु की महिलाओं में अंत:स्रावी विकारों में एक ऐसा विकार है, जिससे बांझपन होता है। यदि कोई महिला दर्दनाक अनियमित मासिक धर्म या मुंहासे से ग्रस्त है और उसका वजन भी बढ़ रहा है, तो समझिए वह पीसीओएस नामक हार्मोन असुंतलन से गुजर रही है।

5. कुछ लक्षण…

इस मुद्दे पर विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर ऐसे लक्षण किसी भी महिला में हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह भी बांझपन की शिकार है। वरन् जब यह लक्षण कुछ ज्यादा समय के लिए बढ़ जाएं तो उस महिला को सतर्क होने की आवश्यकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेने में एक मिनट भी ना हिचकिचाएं।

6. इस सिंड्रोम के कारण होता है

वैसे तो बांझपन उत्पन्न करने वाला पीसीओएस एक बेहद सामान्य सिंड्रोम है जो इन दिनों भारतीय महिलाओं में देखा गया है। लेकिन अभी भी अधिकांश महिलाएं इस सिंड्रोम से अनजान हैं। यह मुंहासे से लेकर, वजन बढ़ाने और हार्मोन असुंतलन जैसी अन्य समस्याएं भी उत्पन्न करता है।

7. जानें कुछ लक्षण

इसके अलावा तैलीय त्वचा, जो पहले नहीं होती थी लेकिन कुछ समय से होने लगी है। किसी भी स्त्री की तैलीय त्वचा होना आम बात है, लेकिन ड्राई स्किन वाली स्त्रियों की अचानक बदलती स्किन पर गौर करना जरूरी है।

8. बाल झड़ने लगें तो…

इसके अलावा बालों का झड़ना या फिर हल्के हो जाना भी एक लक्षण है। यह भी हो सकता है कि जब किसी महिला में बांझपन जैसा विकार उत्पन्न हो रहा हो तो वह सामान्य से कुछ अजीब व्यवहार करने लगे। स्वभाव में चिड़चिड़ापन और बिना वजह के बातों को बढ़ाना, उनकी शारीरिक परेशानी को दर्शा सकता है।

9. शारीरिक अंगों में बदलाव

लेकिन अंदरूनी बदलाव एक साथ एक महिला के बाहरी शारीरिक अंगों में बदलाव भी बांझपन के होने का संकेत देते हैं। अचानक स्तनों का विकास कम हो जाना या फिर त्वचा में झुनझुनाहट आना एक ऐसा लक्षण है जिस पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसा हो तो फौरन डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

10. उपचार के तरीके

इसके अलावा और भी गहराई से देखा जाए तो ऐसे कई लक्षण निकलकर सामने आते हैं जो चौंकाने वाले हैं। लेकिन इसका इलाज होना भी संभव है। बांझपन के उपचारों के अंतर्गत पहला है डिंबक्षरण को खत्म करना। गर्भ धारण करने के लिए महिलाओं में अंडोत्सर्ग होना जरूरी है, लेकिन यह सिंड्रोम डिंबक्षरण में समस्याएं पैदा करता है, जिसे औषधि-प्रयोग द्वारा ठीक किया जा सकता है।

11. सर्जरी भी है मौजूद

अगला है लैप्रोस्कोपी, जो एक ऐसा उपचार है जिसके द्वारा गर्भाशय और ट्यूब की जांच की जाती है। इसे की-होल सर्जरी भी कहा जाता है, इसमें अंडाशय की पुटिका विद्युतधारा प्रवाह के साथ पतली सुई के प्रयोग से जला दी जाती है। ऐसा करने से पीड़ित स्त्री में बने हुए हार्मोन के असुंतलन में सुधार आता है। साथ ही गर्भावस्था प्राप्त करने में भी सहायता प्राप्त होती है।

12. कुछ घरेलू उपचार भी

लेकिन यदि घरेलू उपचारों से भी बांझपन की दिक्कत को कोई महिला समाप्त करना चाहती है तो उसके लिए भी खासतौर पर कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो पीड़ित महिला के लिए लाभकारी हैं। इसमें पहला है फर्टिलिटी डाइट लेने का उपाय, एक ऐसी डाइट जो किसी सलाहकार से ली जा सकती है।

13. इससे गर्भवती होने के अवसर बढ़ सकते हैं.

इसकी मदद से किसी महिला के गर्भवती होने के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके अलावा जितना संभव हो उतना ही महिलाओं को अपने रोज़ाना के भोजन से अधिक से अधिक मात्रा में प्रोटीन फूड लेना चाहिए। कोई चाहे तो किसी न्यूट्रिशनिस्ट से प्रोटीन डाइट भी बनावाई जा सकती है।

14. खाना-पीना रखें सही

इसके अलावा भोजन करने का समय सही रखें, देरी तो बिलकुल भी ना करें। क्योंकि पहले से ही कुछ कमज़ोरियों के कारण एक महिला का शरीर बांझपन का शिकार हो जाता है। ऐसे में खाने में आने वाली कमियां इस बीमारी को और भी बढ़ा सकती हैं।

15. व्यायाम भी है जरूरी

इसके अलावा रोज़ाना या फिर कम से कम 2-3 दिनों के बाद व्यायाम करना भी जरूरी है। व्यायाम ऐसा नहीं जो जिम में जाकर किया जाए, इसके लिए महिलाएं डॉक्टर की सलाह ले सकती हैं जिससे उन्हें कुछ खास कसरत के तरीके पता लग सकते हैं।

16. कॉफी को करें ना

आखिरी सलाह लेकिन काफी जरूरी सलाह उन सभी महिलाओं के लिए है जिनकी शादी हो गई है, होने वाली है या फिर वे बेबी प्लानिंग कर रही हैं। जितना संभव हो सके कॉफी का सेवन करना छोड़ दें, या फिर कभी भूलकर भी इसे ना पीयें। ऐसा माना गया है कि कॉफी के सेवन को कम करने से एस्ट्रोजन स्तरों में काफी कमी आ सकती है, जिससे गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है।

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